अनुमान है कि आज करीब 7 हजार लोग दर्शन के लिए पहुंचेंगे, कपाट खुलने के समय मंदिर परिसर में करीब 2 हजार लोग मौजूद थे। यहां सबसे पहले बीते छह महीनों से जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए जा रहे हैं।
वहीं, कपाट बंद होने के समय बद्रीविशाल पर चढ़ा घृत कंबल हटा दिया गया है। बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि इस साल कंबल घी में लबालब मिला है, जो ये संकेत देता है कि पूरे साल मौसम अनुकूल रहेगा।
क्या है घृत कंबल- कैसे बनता है
घृत कंबल माणा गांव की कुंवारी लड़कियां एक ही दिन में उपवास रखकर बनाती हैं। ऊन से बने इस कंबल को बद्री गाय के शुद्ध घी में अच्छी तरह डुबोया जाता है। कपाट बंद होने से पहले भगवान बद्रीविशाल की प्रतिमा को इसी कंबल से पूरी तरह ढक दिया जाता है और धाम 6 महीने के लिए बंद हो जाता है। इस दौरान बर्फबारी और माइनस तापमान में भी कंबल में लगा घी जमता नहीं है।
कपाट खुलने पर जब कंबल हटाया जाता है, तो उसकी हालत को संकेत माना जाता है। अगर कंबल सही सलामत, नरम और घी से भरा मिले, तो इसे अच्छे मौसम, फसल और समृद्धि का संकेत माना जाता है। अगर कंबल सूखा, फटा या सिकुड़ा हुआ मिले, तो इसे संकेत माना जाता है कि बारिश कम हो सकती है, मौसम खराब रह सकता है और लोगों को खेती-बाड़ी या रोजमर्रा के काम में दिक्कतें आ सकती हैं।
अब चारों धामों के कपाट खुल चुके
बद्रीनाथ के कपाट खुलते ही अब श्रद्धालु उत्तराखंड में स्थित चारों धामों के दर्शन कर पाएंगे। इससे पहले अक्षय तृतीया के मौके पर 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले थे, जिसके तीन दिन बाद 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ के कपाट खोले गए। राज्य सरकार का दावा है कि इस बार यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया है जिसके कारण 2025 के मुकाबले इस साल ज्यादा श्रद्धालु पहुंचेंगे।
2025 में करीब 51,06,346 श्रद्धालुओं ने चारों धामों के दर्शन किए थे। यह संख्या साल 2024 की तुलना में लगभग 4.35 लाख ज्यादा थी। वहीं, इस साल अभी तक 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने यात्रा में शामिल होने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है।