पैट्रिएट पर खड़े हुए सवाल
पैट्रिएट सिस्टम को आने वाले प्रोजेक्टाइल (हमलावर चीजों) की भारी संख्या से निपटने में मुश्किल हुई। ईरान के सस्ते ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की बड़ी संख्या ने इसके सामने मुश्किल खड़ी की। ईरान के युद्ध ने साबित किया कि ये सिस्टम बड़े पैमाने पर होने वाले हमलों के सामने कितने सीमित हो जाते हैं।ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब अपने समझौते पर मुश्किल में है। आज सच्चाई ये है कि जिन सिस्टम को एक अभेद्य ढाल के तौर पर बेचा गया। वह एक लीक होती हुई छतरी साबित हो रहे हैं। ऐसे में खाड़ी देशों में इस समय अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर निर्भरता को लेकर बहस देखी जा रही है।
