चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की खंडपीठ ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला नोएडा ब्रिज टोल वसूली निरस्त करने के 20 दिसंबर 2024 के फैसले के समान प्रकृति का है, इसलिए हाई कोर्ट इस पर जल्द सुनवाई करे।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर हाई कोर्ट में नया आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी है। साथ ही टोल रोड के निवेशकों और अन्य प्रभावित पक्षों को भी मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि इन टोल सड़कों पर परियोजना लागत से कई गुना अधिक राशि वसूली जा चुकी है।
आरोप- रखरखाव खर्च और ब्याज को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया
नोएडा ब्रिज फैसले का जिक्र इसलिए...
नोएडा ब्रिज पर 2001 से टोल वसूली के खिलाफ दायर याचिका में कैग जांच में कंपनी द्वारा परियोजना लागत व खर्च बढ़ाकर दिखाने का खुलासा हुआ। इस आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2016 में टोल वसूली निरस्त कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने 20 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।