बोले- स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा मदद चाहिए
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु तटीय शहरों में बाढ़ से बचाव के स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा मदद चाहता है। साथ ही, क्लाइमेट रेज़िलिएंट मास्टर प्लान 2045' के तहत क्लाइमेट-रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ एक कॉम्प्रिहेंसिव डिजास्टर मैनेजमेंट मिशन भी चाहता है। इसका मकसद जीरो कैज़ुअल्टी (किसी की जान न जाए) हो।विजय ने केंद्र से और क्या मांगा
- विजय ने केंद्र से होगेनाक्कल फेज़-III कंबाइंड वॉटर सप्लाई स्कीम के लिए तय 2,283.40 करोड़ रुपये की मदद जारी करने का भी आग्रह किया।
- स्पेस सेक्टर की बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कुलसेकरपट्टिनम में बन रहे स्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग की।
- केंद्र से हर जिले में उभरती टेक्नोलॉजी वाले स्किल सेंटर स्थापित करने और पांच लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर से जुड़े क्षेत्रों में ट्रेनिंग देने के लिए सहयोग का अनुरोध किया।
चुनौतियों से निपटने के लिए मदद मांगी
उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार कुलसेकरपट्टिनम में IN-SPACe के साथ बनाए गए स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब को 'नेशनल स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब' घोषित करेगी। इससे प्रोपेलेंट से लेकर लॉन्च व्हीकल तक एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग हो सकेगी और देश को ग्लोबल स्पेस इकॉनमी का फायदा उठाने में मदद मिलेगी। डिजिटल कनेक्टिविटी पर विजय ने बताया कि तमिलनाडु में भारतनेट फेज-II का काम लगभग 97 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' की बची हुई चुनौतियों से निपटने के लिए मदद मांगी ताकि हर ग्राम पंचायत को जोड़ा जा सके। रोज़गार और कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मुख्यमंत्री ने युवाओं के विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की।
