दंतेवाड़ा से रायपुर तक पहुँचा महिला समूह का हर्बल गुलाल, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल होली की पहल
Updated on
03-03-2026 12:57 PM
दंतेवाड़ा, कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा होली पर्व को सुरक्षित, स्वास्थ्यप्रद और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में दंतेवाड़ा की माँ दंतेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने प्राकृतिक रंगों से तैयार हर्बल गुलाल बाजार में उतारा है। इस अभिनव पहल को कृषि विज्ञान केंद्र, दंतेवाड़ा का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है, जिसके मार्गदर्शन में समूह की महिलाओं ने वैज्ञानिक तरीके से गुलाल तैयार किया।
समूह द्वारा तैयार यह हर्बल गुलाल दंतेवाड़ा में कलेक्टर कार्यालय के सामने, बचेली के मेन चौक के पास तथा कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में उपलब्ध है। इसके साथ ही रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के लाभांडी स्थित विक्रय उत्पाद केंद्र में भी इसकी बिक्री की जा रही है। इस विस्तार से उत्पाद को स्थानीय स्तर से राज्य स्तरीय बाजार तक पहचान मिली है और महिला समूह को व्यापक विपणन का अवसर प्राप्त हुआ है।
हर्बल गुलाल के निर्माण में हरी पत्तियां, गेंदा, पलाश (टेसू), चुकंदर, मेहंदी, अपराजिता, हल्दी और चंदन जैसे प्राकृतिक एवं औषधीय तत्वों का उपयोग किया गया है। इन फूलों और पत्तियों को छाया में सुखाकर उनका प्राकृतिक रंग और गुण सुरक्षित रखा गया। बाद में इन्हें बारीक पीसकर छाना गया, जिससे गुलाल मुलायम और त्वचा के लिए सुरक्षित बने। हल्दी और चंदन के मिश्रण से इसे सुगंधित और त्वचा-अनुकूल बनाया गया। आकर्षक पैकेजिंग के साथ इसे बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध कराया गया है।यह गुलाल रासायनिक रंगों से पूरी तरह मुक्त है, जिससे जल और मिट्टी प्रदूषण की आशंका नहीं रहती। प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से तैयार यह उत्पाद बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सुरक्षित बताया गया है। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह पहल स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग को भी बढ़ावा देती है।
समूह की महिलाओं ने बताया कि इस कार्य से उन्हें आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में नया अवसर मिला है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षण देकर उत्पादन की तकनीकी जानकारी प्रदान की, जबकि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने विपणन सहयोग उपलब्ध कराया।
कलेक्टर ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को आय का साधन मिला है और त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ा है। जिला पंचायत के सीईओ ने इसे ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार करने वाला प्रयास बताया। ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार यह हर्बल गुलाल उचित कीमत पर उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोग इसे खरीद सकते हैं। सुरक्षित रंगों के उपयोग से त्वचा रोग, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है। यह पहल स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण, तीनों को एक साथ जोड़ते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।
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