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चीन को हम नहीं करने देंगे कब्जा: अमेरिका

Updated on 07-07-2020 08:13 PM
भारत को देंगे सैन्य सहायता
वॉशिंगटन। भारत और चीन में तनाव के बीच अमेरिका ने दो टूक कहा है कि वह प्रशांत महासागर हो या उसके आगे हम अपनी प्रभावी शक्ति की भूमिका से पीछे नहीं हटेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मेडोस ने कहा कि हमारा रुख सख्त बना रहेगा फिर चाहे वह भारत के साथ चीन के विवाद से जुड़ा हुआ हो या कहीं और। उन्होंने यह भी कहा कि चीन की सीमा से सटा कोई भी देश पेइचिंग की आक्रामक कार्रवाई से सुरक्षित नहीं है। तनाव के बीच साउथ चाइना सी में दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने पर मेडोस ने कहा, हमारा संदेश साफ है। हम मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। चाहे चीन हो या कोई और हम उस इलाके या किसी और अन्य जगह पर किसी और देश को सबसे शक्तिशाली, प्रभावी ताकत का दर्जा नहीं लेने देंगे। हमारी सैन्य ताकत मजबूत है और आगे भी मजबूत बनी रहेगी। फिर चाहे वह भारत और चीन के बीच संघर्ष से जुड़ा हो या कहीं और।
अमेरिका अभी भी दुनिया की श्रेष्ठ सैन्य ताकत है
मेडोस ने कहा कि अमेरिका का मिशन है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विश्व यह जाने कि अमेरिका अभी भी दुनिया की श्रेष्ठ सैन्य ताकत है। अमेरिका का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब चीन ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिक भारत से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में पीछे हटने और तनाव कम करने की दिशा में 'प्रगतिÓ के लिए 'प्रभावी कदमÓ उठा रहे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान की टिप्पणी तब आई जब नई दिल्ली में सरकारी सूत्रों ने कहा कि क्षेत्र से सैनिकों को हटाने के पहले संकेत के तौर पर चीनी सेना गलवान घाटी में कुछ क्षेत्रों से तंबू हटाती और पीछे जाती हुई दिखी। गलवान घाटी ही वह जगह है जहां 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। झड़प में चीनी सेना को भी नुकसान हुआ जिसने अब तक इस बारे में कोई ब्योरा साझा नहीं किया है।
सूत्रों ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी गश्त बिंदु 'प्वाइंट-14Ó से अपने तंबू और ढांचे हटाती दिखी है। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों के वाहन गलवान के सामान्य क्षेत्र और गोग्रा हॉट स्प्रिंग्स में वापस जाते दिखे। गलवान घाटी में विवाद के बिन्दु से चीन के पीछे हटने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर झाओ ने कहा, 'अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिक पीछे हटने और तनाव कम करने के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं और इस दिशा में प्रगति हुई है।

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