क्यों आगे बढ़ेगी मुकदमेबाजी?
रेटिंंग एजेंसी मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी ने सीएनबीसी को बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर चुप रहता है और प्रशासन कोई मुआवजा प्रदान नहीं करता है तो व्यवसायों की ओर से महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है। इस पर अंत में अदालत को निर्णय लेना होगा,"ट्रंप ने दी थी क्या चेतावनी?
ट्रंप ने टैरिफ को एक लीवरेज और लाइफलाइन दोनों के रूप में पेश किया था। विदेशी सरकारों से व्यापार, आप्रवासन, ड्रग एनफोर्समेंट और सैन्य संघर्षों पर रियायतें निकालने का एक उपकरण का आधार बनाया था। दावा था कि वह अंत में इससे इनकम टैक्स को रिप्लेस कर सकती है। उन्होंने अमेरिकियों को 2,000 डॉलर के टैरिफ डिविडेंड चेक भेजने का भी प्रस्ताव दिया था। ट्रंप ने 12 जनवरी को सोशल मीडिया पर कहा था, 'हम बर्बाद हो जाएंगे! अगर कोर्ट टैरिफ को पलट देता है।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर टैरिफ लागू नहीं होते तो देश को 'आर्थिक आपदा' का सामना करना पड़ेगा। मामले को 'जिंदगी और मौत' का मामला बताया था।उपभोक्ता लागत पर क्या असर होगा?
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टैरिफ ने पहले ही कीमतें बढ़ा दी हैं। 2025 में फर्नीचर और कपड़ों से लेकर भोजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कारों तक के आयात पर हर घर के लिए लगभग 1,000 डॉलर की लागत बढ़ा दी थी। सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में टैक्स फाउंडेशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी थी। 2026 के लिए यह अतिरिक्त बोझ 1,300 डॉलर से 1,700 डॉलर के बीच बढ़ने का अनुमान था।IEEPA टैरिफ अब समाप्त कर दिए गए हैं। ऐसे में विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले साल घरेलू लागत लगभग आधी हो सकती है। इससे बोझ में एक अनुमान के मुताबिक, 600 डॉलर से 800 डॉलर की कटौती होगी। हालांकि, कीमतें 2025 से पहले के स्तर पर लौटने की संभावना नहीं है। कारण है कि अलग-अलग कानूनों के तहत लगाए गए अन्य टैरिफ अभी भी लागू हैं।
