डिजिटल क्रांति ने बदल दिया प्रॉपर्टी मार्केट, 60 साल में होने वाला काम अब 25 साल के युवा कर रहे हैं
Updated on
17-02-2026 12:32 PM
नई दिल्ली: यह बीते जमाने की बात थी जबकि लोग रिटायर होने के वक्त मकान बनवाते थे या कोई फ्लैट खरीदते थे। जब से सस्ते ब्याज दरों पर आसानी से होम लोन मिलने लगा है तो स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन हो गया है। अब मकान खरीदने वालों में 90 से 95 फीसदी मिलेनियल्स (Millennials) और जेन ज़ी (Gen Z) मतलब कि युवा पीढ़ी के लोग हैं। इसका खुलासा होम लोन पर जारी एक रिपोर्ट से हुआ है।
किसने जारी की है रिपोर्ट
हाउसिंग फाइनेंस कंपनी, BASIC Home Loan ने Paytm और CommsCredible के साथ मिलकर एक हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। 'How Bharat Finances Its Housing Dreams: A Consumer Insights Report on Housing Inclusion.' नाम की इस रिपोर्ट को नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) के पूर्व अध्यक्ष आर वी वर्मा ने जारी किया। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे टेक्नोलॉजी और खरीदारों के बदलते व्यवहार से भारत में घर खरीदने का सपना पूरा हो रहा है।
जेन जी खरीद रहे हैं मकान
दशकों से देखा जाए तो भारतीयों के लिए, अपना मकान होना एक बड़ा सपना रहा है। मकान का मालिक बनना स्थिरता और सफलता का प्रतीक माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अब मकान खरीदने के लिए युवा लोग ज़्यादा सामने आ रहे हैं। इसके मुताबिक मकान खरीदने वालों में 90 से 95 प्रतिशत तक मिलेनियल्स (Millennials) और जेन ज़ी (Gen Z) हैं।
ऑनलाइन सर्च और अप्लाई
रिपोर्ट का कहना है कि ये युवा खरीदार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में माहिर हैं। 40 साल से कम उम्र के लगभग 72 प्रतिशत लोग अपना होम लोन ऑनलाइन अप्लाई करना पसंद करते हैं। उन्हें यह तरीका बहुत आसान और सुविधाजनक लगता है। वे अपने मोबाइल फोन से ही अलग-अलग लेंडर्स (लोन देने वाली कंपनियां) की तुलना कर सकते हैं, ज़रूरी कागज़ात अपलोड कर सकते हैं और अपने लोन की अर्ज़ी की स्थिति जान सकते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि 60 साल से ज़्यादा उम्र के लोग भी अब डिजिटल तरीके से लोन लेने में सहज हो रहे हैं। लगभग 46 से 47 प्रतिशत बड़े-बुज़ुर्ग भी डिजिटल तरीके से लोन अप्लाई कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि ऑनलाइन लोन देना अब आम बात हो गई है।
डिजिटल क्रांति से आया बदलाव
बेसिक होम लोन के फाउंडर और सीईओ अतुल मोंगा बताते हैं "इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है भारत का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (डिजिटल क्रांति)। DigiLocker जैसे ऐप और टूल लोगों को अपने ज़रूरी कागज़ात ऑनलाइन सेव करने और शेयर करने की सुविधा देते हैं। आज, 35 साल या उससे कम उम्र के लगभग 80 प्रतिशत लोग अपने ज़्यादातर काम के लिए DigiLocker का इस्तेमाल करते हैं, खासकर होम लोन अप्लाई करते समय। इससे कागज़ों का वो पुराना लंबा और थकाऊ काम खत्म हो गया है। ऑनलाइन होने से कागज़ों का काम कम हो जाता है, लोन जल्दी अप्रूव हो जाता है और यह प्रक्रिया खरीदार और लोन देने वाली कंपनी, दोनों के लिए आसान हो जाती है।"
मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Currency Reserve) में बड़ी गिरावट हुई है। बीते सप्ताह अपना फॉरेन करेंसी एसेट या एफसीए (FCA) भंडार तो घटा ही है। साथ ही…
नई दिल्ली: भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली अगले कुछ महीनों में क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े समझौते को अंतिम रूप देने…
नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War) की तपिश इस समय सिर्फ पश्चिम एशिया के देश ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया इससे परेशान है। भारत में देखिए तो हर…
नई दिल्ली: सीबीआई ने 228 करोड़ रुपये के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी से पूछताछ की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।…
नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक ने 2016 में नोटबंदी के दौरान दिल्ली की एक कंपनी की 3.2 करोड़ रुपये की नकदी जमा करने से इन्कार कर दिया था। बैंक…
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में टेंशन के बीच होर्मुज स्ट्रेट का नाम हर किसी की जुबान पर है। यह ईरान के दक्षिण में पतला पानी का रास्ता है। फारस की खाड़ी…
नई दिल्ली: महेश चूरी पालघर (महाराष्ट्र) के गांव बोर्डी के रहने वाले हैं। उन्होंने इस गांव में ही बिजनेस का जबरदस्त मॉडल खड़ा करके दिखाया है। वह 'चीकू पार्लर' के…
नई दिल्ली: स्थानीय शेयर बाजारों में बीते गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट आई थी। पश्चिम एशिया में संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेजी आने से ऐसा हुआ…