चांदी की डिमांड नहीं होगी कम
कौशिक ने कहा, 2025 के मध्य तक वैश्विक चांदी की इन्वेंट्री (भंडार) में भारी कमी आई थी। हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी नरमी आई। स्थानीय स्तर पर कमी तेजी से दिखाई देने लगी। पीक मोमेंट में भारतीय स्पॉट (हाजिर बाजार) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों से दोगुने से भी ज्यादा प्रीमियम पर कारोबार कर रही थीं। आयात शुल्क भी खरीदारों को नहीं रोक सका। यह बताता है कि मांग कीमत पर निर्भर नहीं थी, बल्कि जरूरत पर आधारित थी।एक्सपर्ट के अनुसार, अगर हम बड़ी तस्वीर देखें तो यह और भी साफ हो जाती है। भारत 2030 तक सैकड़ों गीगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य रख रहा है। यह कोई व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि एक नीतिगत प्रतिबद्धता है। जब तक हरित ऊर्जा का विस्तार होता रहेगा, चांदी की मांग कम नहीं होगी। यह सीमित सप्लाई के लिए गहनों, निवेश और प्रौद्योगिकी के साथ प्रतिस्पर्धा करेगी। इसीलिए चांदी की चालें लहरों में आई हैं - तेज, असहज और अचानक। यह प्रचार से नहीं, बल्कि सप्लाई की कमी से प्रेरित है। जब कमी बनी रहती है तो कीमतें धीरे-धीरे नहीं बढ़तीं। वे उछलती हैं, रुकती हैं, और फिर उछलती हैं।
आखिरी में कौशिक ने कहा कि सोने को सारी सुर्खियां मिलती हैं। चांदी अपना मुश्किल काम करती है। इस समय भारत मुनाफे की तलाश में नहीं है, बल्कि जरूरी चीजों और सुरक्षा को पक्का कर रहा है। बाजार हमेशा लोगों के व्यवहार का अनुसरण करते हैं। चांदी को लेकर भारत का व्यवहार स्पष्ट रूप से बदल गया है।
