भर-भरकर भारत आ रहे रूसी तेल के टैंकर, अमेरिका ने लगाया बैन तो रूस ने ढूंढ लिया दूसरा रास्ता
Updated on
21-01-2026 12:34 PM
नई दिल्ली: अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगा दिया है। इसका असर भारत पर भी दिखाई दिया है। इसके बावजूद रूसी तेल का भारत को आयात जारी है। अमेरिकी बैन के बाद रूस ने तेल भेजने के लिए दूसरा रास्ता ढूंढ लिया है। रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा अब उन छोटे-छोटे व्यापारियों के जरिए आ रहा है, जो पहले शायद ही कभी भारत को तेल बेचते थे।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि रूस की बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) से आने वाले तेल की मात्रा में भारी कमी आई है। डेटा बताने वाली कंपनी केप्लर (Kpler) के मुताबिक, इस महीने के पहले 15 दिनों में रूस से आने वाले कुल तेल का लगभग 43% हिस्सा (करीब 0.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) पांच ऐसे ही व्यापारियों से आया है।
इन जहाजों के जरिए आया तेल
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार जनवरी के 15 दिनों में जिन जहाजों से तेल भारत आया है उनके नाम रेडवुड ग्लोबल सप्लाई (Redwood Global Supply), विस्टुला डेल्टा (Vistula Delta), एथोस एनर्जी (Ethos Energy), अल्गफ मरीन (Alghaf Marine) और स्लावियांस्क ईसीओ (Slavyansk ECO) हैं। ये व्यापारी दिसंबर 2025 से पहले लगभग दो साल तक भारत को एक भी तेल का जहाज नहीं भेज रहे थे। इनमें से रुसएक्सपोर्ट और स्लावियांस्क ईसीओ रूसी कंपनियां हैं, जबकि रेडवुड ग्लोबल सप्लाई, अल्गफ मरीन और विस्टुला डेल्टा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से जुड़ी हुई हैं।
बैन के बाद कितना अंतर
अमेरिका के बैन के बावजूद रोसनेफ्ट इस महीने के पहले पंद्रह दिनों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा रूसी तेल सप्लायर बना रहा। लेकिन केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, रोसनेफ्ट से आने वाले तेल की मात्रा साल 2025 के औसत से लगभग 75% कम हो गई, जो अब करीब 225,000 बैरल प्रतिदिन (bpd) रह गई है।
साल 2025 में रोसनेफ्ट भारत को हर दिन औसतन 9,12,000 बैरल तेल भेजता था।
यह भारत के रूस से कुल तेल आयात का लगभग 53% था।
इस महीने के पहले 15 दिनों में रूस से भारत का कुल तेल आयात 1.179 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा।
यह साल 2025 के औसत से लगभग 30% कम है।
इस कुल आयात में रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 19% रह गई है।
लुकोइल की क्या स्थिति?
एक और अमेरिकी प्रतिबंधों वाली कंपनी लुकोइल (Lukoil) से भी तेल की आवक बहुत कम हो गई है। इस महीने के पहले 15 दिनों में लुकोइल ने करीब 43,000 बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जो पिछले साल के औसत से 84% कम है। भारत के रूसी तेल आयात में लुकोइल की हिस्सेदारी 16% से घटकर 4% से भी कम हो गई है।
यह सप्लायर बना बड़ा खिलाड़ी
अब रूस से सबसे ज्यादा तेल भेजने वाला सप्लायर रुसएक्सपोर्ट (RusExport) बन गया है। इस महीने के पहले पंद्रह दिनों में इसने करीब 2,55,000 बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जो रूस से कुल तेल आयात का लगभग पांचवां हिस्सा है। रुसएक्सपोर्ट पिछले साल मई से लगातार तेल भेज रहा है, लेकिन इससे पहले के 16 महीनों में इसने भारत को एक भी तेल का जहाज नहीं भेजा था।
इस महीने रेडवुड ग्लोबल सप्लाई ने करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन, विस्टुला डेल्टा ने 1,45,000 बैरल प्रतिदिन, एथोस एनर्जी ने 74,000 बैरल प्रतिदिन, अल्गफ मरीन ने 50,000 बैरल प्रतिदिन और स्लावियांस्क ईसीओ ने 43,000 बैरल प्रतिदिन तेल भेजा है। शिपिंग डेटा के अनुसार, जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच इन व्यापारियों में से किसी ने भी भारत को एक भी तेल का जहाज नहीं भेजा था।
किसने तेल रोका, किसने रखा जारी
भारतीय खरीदार रूसी तेल के असली स्रोत को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। वे ऐसी किसी भी खेप से बचना चाहते हैं जो प्रतिबंधित कंपनियों से जुड़ी हो। भारत की सबसे बड़ी रूसी तेल खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस महीने के पहले 15 दिनों में कोई भी तेल नहीं खरीदा। एचपीसीएल (HPCL), एचएमईएल (HMEL) और एमआरपीएल (MRPL) ने भी रूस से तेल लेना बंद कर दिया है। हालांकि, इंडियन ऑयल (Indian Oil), रोसनेफ्ट (Rosneft) समर्थित नायरा एनर्जी (Nayara Energy) और बीपीसीएल (BPCL) अभी भी रूस से तेल खरीद रहे हैं।
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