मुंबई। लॉकडाउन में आंशिक ढील दिए जाने के कारण होटल, रेस्तरां तथा खानपान सेवाओं के धीरे-धीरे खुलने से देश की दूध खपत में जून में कुछ सुधार आया है। दूध खपत में सुधार से किसानों, प्रसंस्करण करने वाली कंपनियों और सरकार सहित डेरी मूल्य शृंखला के सभी हितधारकों को राहत मिली है। आपूर्ति की अधिकता को कम करने के अलावा दूध की खपत में इस बढ़ोतरी से उन डेयरी कंपनियों के दबाव में भी कमी आएगी, जो 25 मार्च से शुरू होने वाले लगभग 10 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण गंभीर आर्थिक परेशानी से जूझ रही थी। विश्वव्यापी कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी का प्रसार रोकने के लिए 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के परिणामस्वरूप सड़क किनारे चाय बेचने वाले, होटल, रेस्तरां और खानपान सेवा सहित दूध की सभी प्रमुख खपत वाले क्षेत्र बंद हो गए थे। इसके अलावा उपभोक्ताओं ने आइसक्रीम, केक और अन्य ऐसे उत्पादों से भी दूरी बना ली थी, जिनमें दूध और इसके उत्पादों का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा कि खानपान सेवाओं को सीमित संख्या में काम की अनुमति के कारण दुकानों, होटलों और रेस्तरां आदि धीरे-धीरे खुलने से दूध खपत की स्थिति में 5 से 10 फीसदी का सुधार हुआ है।
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