भारत को होगा प्रतिस्पर्धियों पर फायदा
भारत-अमेरिका डील पिछले हफ्ते भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच घोषित मेगा फ्री ट्रेड डील के ठीक बाद हुई है। इसमें ईयू को भारत के 99% से ज्यादा निर्यात पर टैरिफ कम किए गए थे। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि यह डील छह सालों में भारत और 27 देशों के ब्लॉक के बीच व्यापार को 136 अरब डॉलर से दोगुना कर देगी। 27 जनवरी, 2026 को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने नए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की सराहना की। ऐसा करते हुए इसे एक ऐतिहासिक फायदे का सौदा बताया जो 2 अरब लोगों के लिए एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाता है। उन्होंने कहा, 'भारत आगे बढ़ा है और यूरोप सच में खुश है।'उम्मीद है कि भारत को अपने सीधे निर्यात करने वाले प्रतिस्पर्धियों पर थोड़ा फायदा मिलेगा। एएसपीआई (एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट) की सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट और पूर्व कार्यवाहक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि वेंडी कटलर ने कहा, 'यह घोषणा निश्चित रूप से हमारे भारतीय भागीदारों के लिए राहत की बात है... महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के लिए अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपने आसियान प्रतिस्पर्धियों की तुलना में थोड़ा फायदा होगा। उन्होंने 19%-20% टैरिफ हासिल किए हैं।'
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार
भारत ने 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पाद खरीदने पर भी सहमति जताई है। लेकिन, इस बड़ी खरीद को पूरा करने के लिए अभी तक कोई समयसीमा नहीं दी गई है।वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका से भारत का आयात 46 अरब डॉलर था। जबकि इसी दौरान अमेरिका को भारत का माल निर्यात 86.5 अरब डॉलर था। मौजूदा वित्तीय वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात 9.75% बढ़कर 65.87 अरब डॉलर हो गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक रूस से पेट्रोलियम, कच्चे तेल और उत्पादों का आयात कम होकर 33 अरब हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह सालाना 53.5 अरब डॉलर था।
