इलाज नहीं मिलने से लाड़ले ने दम तोड़ा, शव के कोरोना टेस्ट की मांग को लेकर नहीं किया गया अंतिम संस्कार
Updated on
07-06-2020 08:00 PM
दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले के शिवदासपुर गांव से सरकार के लिए बेहद शर्मनाक तस्वीरें सामने आई हैं। यहां एक महिला अपने पति के शव के साथ पिछले 24 घंटे से घर पर है। साथ में उसके छोटे-छोटे तीन बच्चे भी भूखे-प्यासे हैं, लेकिन गांव के लोग चाह कर भी उनकी मदद नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें शक है कि मृतक को कोरोना है। जिंदगी रहते मृतक लाडले के इलाज के लिए सरकार ने कोई इंतजाम नहीं किया और मौत के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उसके लिए कोरोना टेस्ट का इंतजाम नहीं कर पा रही है। मृत युवक की पत्नी सहित गांव के लोग मृतक की कोरोना जांच की मांग कर रहे हैं और तब तक शव को दफनाने से रोक रखा है।
हालांकि, मौत के 24 घंटे बाद भी मृतक का कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल नहीं लिया गया। गर्मी ज्यादा होने के कारण अब शव से बदबू भी आने लगी है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। पत्नी की बात मानें तो मृतक लाडले अपने परिवार के साथ 2 जून को दिल्ली से दरभंगा के सिंहवाड़ा अपने घर पहुंचे थे। मृतक तेज बुखार से पीड़ित था और सांस लेने में तकलीफ भी हो रही थी। तब लाडले और उसकी पत्नी ने अपने पति के इलाज और खुद बच्चों सहित क्वारेंटाइन में रखने की बात कही, लेकिन एक अधिकारी ने क्वारेंटाइन बंद होने की बात कहकर घर पर ही रहकर पति का इलाज कराने को कहा।
पत्नी बीमार पति को लेकर लौट गई, लेकिन समय के साथ पति की तबीयत बिगड़ती चली गई तो महिला अपने पति को लेकर अपने मायके शिवदासपुर चली गई। बीमार हालात में दिल्ली से आने की बात सुनकर गांव में हलचल होने लगी। लोगों को लगा कि उसे कोरोना का संक्रमण है। निजी डॉक्टर ने भी कोरोना संदिग्ध मानकर इलाज से हाथ खड़े कर दिए। तब भयभीत गांव के लोगों ने इसकी सूचना गांव के मुखिया राजीव चौधरी को दी। इधर, मुखिया ने बिना समय गंवाए इसकी सूचना प्रखंड चिकित्सा प्रभारी को दी और लाडले के इलाज का समुचित प्रबंध करने का आग्रह किया। एम्बुलेंस की भी मांग की, लेकिन डॉक्टर ने यह कह कर मदद करने से इनकार कर दिया कि अब लॉकडाउन खत्म हो गया है। ऐसे में अपने वाहन से आप अस्पताल जाएं। दूसरी ओर लाडले को कोरोना संक्रमित होने की बात फैलने की वजह से कोई वाहन मालिक उसे अपनी गाड़ी में ले जाने को तैयार नहीं हुआ।
मुखिया ने बताया उन्होंने एक के बाद एक जिलो से सभी बड़े अधिकारियों को इसकी सूचना दी, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। इलाज के अभाव में आखिरकार 5 जून को लाड़ले की मौत हो गई। मौत के बाद गांव के सभी लोग दहशत में आ गए और शव की कोरोना जांच कराने की मांग करने लगे। मुखिया ने फिर प्रशासन के लोगों से संपर्क साधा, लेकिन मदद नहीं मिली। देखते-देखते 24 घंटे बीत गए तब से महिला अपने तीनों बच्चे के साथ अपने पति के शव के साथ है।
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