मुंबई। भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुईं हिंसक टकराव ने एक बार फिर भारत में चीनी कंपनियों के बिजनेस और दबदबे को लेकर चर्चा तेज कर दी है। चीन के लिए भारत एक बहुत बड़े बाजार के रूप में उभरा है। चीन की कंपनियों ने हर सेक्टर में भारी भरकम निवेश किया है। चीन की कंपनियों के सस्ते उत्पाद भारत में अपनी जडे़ इस कदर जमा चुके हैं कि उनको उखाड़ना बहुत मुश्किल है। चीनी कंपनियों को भारत सरकार से या प्राइवेट सेक्टर से फिलहाल कोई कॉन्ट्रैक्ट जल्द ही मिलने की संभावना नहीं है। पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हुआवेई कंपनी, जिसका भारत के 5जी मार्केट में उतरने की पहले से ही कम अवसर थे, अब और भी कम हो गया है। स्मार्टफोन मार्केट भारत में 2 लाख करोड़ रुपए का है। इसमें 72 प्रतिशत हिस्सा चीन की कंपनियों के प्रोडक्ट का है। टेलीकॉम इक्विपमेंट का बाजार 12,000 करोड़ रुपए का है। इसमें चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है।
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नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक ने 2016 में नोटबंदी के दौरान दिल्ली की एक कंपनी की 3.2 करोड़ रुपये की नकदी जमा करने से इन्कार कर दिया था। बैंक…
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में टेंशन के बीच होर्मुज स्ट्रेट का नाम हर किसी की जुबान पर है। यह ईरान के दक्षिण में पतला पानी का रास्ता है। फारस की खाड़ी…
नई दिल्ली: महेश चूरी पालघर (महाराष्ट्र) के गांव बोर्डी के रहने वाले हैं। उन्होंने इस गांव में ही बिजनेस का जबरदस्त मॉडल खड़ा करके दिखाया है। वह 'चीकू पार्लर' के…
नई दिल्ली: स्थानीय शेयर बाजारों में बीते गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट आई थी। पश्चिम एशिया में संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेजी आने से ऐसा हुआ…