मुंबई हमले के गुनहगार हेडली को भारत को नहीं सौंपेगा अमेरिका, प्रत्यर्पण से किया इनकार
Updated on
28-06-2020 12:43 AM
वॉशिंगटन। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमलों के दोषी डेविड हेडली को अमेरिका भारत को प्रत्यर्पित नहीं करेगा। वहीं, हमले के एक दूसरे मास्टरमांइंड तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पित किए जाने की संभावना है। अमेरिकी अटॉर्नी ने राणा की दोबारा गिरफ्तारी के बाद कोर्ट को बताया कि हेडली अमेरिका की जेल में 35 साल की सजा काट रहा है। डेविड कोलमेन हेडली के बचपन के दोस्त राणा को भारत के अनुरोध पर 10 जून को फिर से गिरफ्तार किया गया था। भारत ने 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में राणा की संलिप्तता के लिए उस प्रत्यर्पित करने का अनुरोध किया था।
बता दें कि भारत में राणा को भगोड़ा घोषित किया गया है। राणा की जमानत याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी। फेडरल प्रासिक्यूटर्स के मुताबिक 2006 से नवंबर 2008 के बीच राणा ने दाऊद गिलानी उर्फ हेडली के साथ मिलकर हमले की साजिश रची थी। इन दोनों आतंकियों ने लश्कर-ए-तैयबा तथा हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी को मुंबई में आतंकी हमलों की साजिश रचने तथा हमलों को अंजाम देने में मदद की थी। बता दें कि पाकिस्तानी मूल का अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली लश्कर का आतंकी है। वह 2008 के मुंबई हमलों के मामले में सरकारी गवाह बन गया है। वह हमले में भूमिका के लिए अमेरिका में 35 साल की सजा काट रहा है।इसकारण अमेरिका ने हेडली के प्रत्यर्पण से इनकार किया है।
वहीं अमेरिका ने राणा के प्रत्यर्पण को लेकर भारत का अनुरोध अभी दर्ज नहीं किया है, हालांकि वह जल्द ही कर सकता है। यह साफ है कि इलिनोइस की अदालत में राणा पर जिन आरोपों पर मुकदमा चलाया गया, वे और भारत की शिकायत में लगाए गए आरोप अलग होंगे। राणा ने अपने बचाव में कहा है कि सह-साजिशकर्ता हेडली को प्रत्यर्पित नहीं करने का अमेरिका का फैसला असंगत है और उसके प्रत्यर्पण को भी रोकता है। सहायक अमेरिकी अटॉर्नी जे. ललेजियान ने लास एंजिलिस की संघीय अदालत में शुक्रवार को कहा कि राणा के विपरीत हेडली ने हमलों में अपनी सलिप्तता तुरंत स्वीकार कर सभी आरोपों में दोष भी स्वीकार कर लिया था।इसकारण हेडली का भारत प्रत्यर्पण नहीं किया जाएगा। राणा ने न दोष स्वीकारा और न ही अमेरिका के साथ सहयोग किया।इसकारण उसके साथ परिस्थिति अलग है।इसकारण राणसा को वह लाभ नहीं मिल सकते जो हेडली को दिए गए।
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